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सेब का बाग़ और बरगद का पेड़( The apple orchard and the Banyan tree )HINDI AVATAR OFA FOR APPLE ACORN AARDVARK

एक सेब का बाग़ था । उस में एक सेब का पेड़ हमेशा अपने लाल लाल सेबों से लदा रहता था । उस पर ढेर सारे सेब फलते थे । उस पर इतने ढेर सारे सेब फलते थे कि उसकी टहनियाँ उनके भार से झुक कर ज़मीन पर आ जातीं । बाग़ के सभी प्राणी बड़े चाव से उन सेबों का आनंद उठाते । गाय, बकरी, गिलहरी, यहाँ तक कि चिड़ियाँ और तितलियाँ भी उसके रसीले सेबों का आनंद उठाती। तितलियाँ और भँवरें एक सेब के पेड़ से उड़ कर दूसरे सेबों के पेड़ पर जा बैठते तो वह पेड़ भी फलने फूलने लगता । यही तो इन छोटे छोटे जीवों का चमत्कार है ।

एक दिन उस सेब के बाग़ में दो टाँगो वाले दो प्राणी आए, एक आदमी और एक औरत । दोनों सेब के पेड़ को देख कर मुग्ध हो गए । उन्होंने सेबों को खूब छक कर खाया । अब उनके मन में लालच आ गयी । उन्होंने सोचा कि अगर हम इन सेबों को शहर के बाज़ारों में बेचेंगे तो हमारी खूब आमदनी होगी ।बस फिर क्या था ! दोनों सेबों को तोड़ तोड़ कर लकड़ी के बक्से में भरने लगे और उनको शहर पहुँचने लगे ।

थोड़े दिन बाद वे और लोगों को लाए जो उनकी मदद करते । थोड़े ही दिनों में सेब के पेड़ सेबों से ख़ाली हो गए ।

बाग़ में एक भी सेब नहीं बचा । बाग़ में रहने वाले सभी प्राणी भूखे रह गए । उन्होंने बाग़ को छोड़ देने का निश्चय किया । सभी प्राणी , गाय, भैंस , बकरी , यहाँ तक कि तितली , भँवरें भी सपरिवार बाग़ को छोड़ कर जाने लगे । थोड़े ही दिनों में सेब का बाग़ ख़ाली हो गया ।

सेब का पेड़ अपने मित्रों के जाने से बात दुखी हो गया । उस पर सेब फलने भी बंद हो गए । बाक़ी पेड़ भी सेबों से ख़ाली हो गए ।बाग़ बिलकुल सुनसान हो गया ।

दोनो मनुष्य भी दुखी हो गए । अब उनकी आमदनी भी जो बंद हो गयी थी । वे दोनों सोच में डूब गए । अचानक उनको सूझा कि क्यूँ ना हम किसी पेड़-पौधों के डॉक्टर के पास जाते हैं । शायद वह हमें रास्ता बताए कि कैसे सेब के पेड़ पर पुनः सेब फलने लगे । फिर क्या था । उन्होंने आव देखा ना ताव , चल पड़े पेड़-पौधों के डॉक्टर से मिलने जिसे अंग्रेज़ी में होर्टिकलचरिस्ट कहते हैं । हैं ना टेढ़ा सा नाम !

वह डॉक्टर भी उतना ही टेढ़ा था । वह समझ गया कि इन मनुष्यों के लालच ने पूरे बाग़ को तबाह कर दिया । इस बाग़ को इनसे बचाना बहुत ज़रूरी है । उसने उन दोनो को सलाह दी कि तुम लोग कोई दूसरे पेड़ उगाओ जिससे तुम्हें इससे भी ज़्यादा आमदनी होगी । उसने उनको एक बरगद के पेड़ का बीज दिया और कहा इसे बो दो और इंतेज़ार करो । यह बरगद का एक पेड़ पूरा बाग़ बन जाएगा । तब तक तुम लोग सेब के बाग़ में मत जाना ।

दोनो मनुष्य उस बरगद के बीज को के कर ख़ुशी ख़ुशी घर आ गए । अब बरगद का पेड़ वहाँ तो उगता नहीं जहां सेब के फल होते हैं ।चुनांचे इन दोनों को सेब के बाग़ से बहुत दूर जाना पड़ा । वहाँ जा कर उन्होंने बरगद के बीज को बो दिया ।

और करने लगे इंतजार उसके बाग़ बनने का । बरगद के पेड़ को बड़े होने में बहुत समय लगता है और बाग़ बनने में और भी समय लगता है । उसके जड़ टहनियों से नीचे आते हैं, ज़मीन को पकड़ते हैं और इस तरह फैलते हैं ।

कई साल बीत गए । दोनों मनुष्य इंतज़ार करने लगे कि कब बरगद का बाग़ बनेगा, इस में फल लगेंगे और हम फिर अमीर हो जाएँगे । इंतज़ार करते करते दोनो बूढ़े हो गए । और तब उन्हें मालूम पड़ा कि कि बरगद के पेड़ पर कोई फल ही नहीं होता । उल्टा, वह इतना सघन और भयानक होता है कि वहाँ बहुत सारे जंगली जानवर बसते हैं । उस पेड़- पौधों के डॉक्टर ने उन्हें खूब छकाया !

यहाँ सेब का पेड़ फिर से फलने फूलने लगा ।उसे आराम जो मिल गया था । उसके बाक़ी दोस्त भी फलने लगे । उन रसीले सेबों को देख कर सारे प्राणी वापस आने लगे ; भेड़, बकरी, गाय, भँवरे, तितलियाँ । सब मज़े से बाग़ में रहने लगे ।उनकी वजह से सेब के पेड़ फलों से लदने लगे । पूरा बाग़ ख़ुशी से झूम उठा ।

उधर दोनों मनुष्य हाथ मलते रह गए । अब उन में इतनी ताक़त नहीं बची थी की वह इतना लम्बा सफ़र तय कर के फिर से सेब के बाग़ जाएँ और अपना काम- धंधा शुरू करें । यहाँ घने से बरगद के नीचे उन्होंने अपनी कुटिया बना ली और उन्हीं जंगली जानवरों के बीच रहने लगे । जो थोड़ा बहुत काम कर के उन्हें मिलता उसी से पेट भरते थे । इसीलिए कहा जाता है की “ लालच बुरी बला है ।”

क्षिप्रा शुक्ल

The English avatar of this story .

इस कहानी का अंग्रेज़ी अवतार

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